Multibagger : शेयर मार्केट में कई कंपनियां समय-समय पर शानदार रिटर्न देकर निवेशकों का ध्यान खींचती हैं, लेकिन Lloyds Metals & Energy का सफर पिछले कुछ वर्षों में सबसे अलग रहा है। करीब पांच साल पहले जिस कंपनी का शेयर ₹55 के आसपास कारोबार कर रहा था, वह अब बढ़कर ₹1,766 के स्तर तक पहुंच चुका है। इस दौरान निवेशकों को लगभग 34 गुना रिटर्न मिला है। दिलचस्प बात यह है कि यह तेजी किसी हाई-ग्रोथ टेक्नोलॉजी या डिफेंस कंपनी में नहीं, बल्कि आयरन ओर और स्टील से जुड़े पारंपरिक बिजनेस में देखने को मिली है।
कंपनी की इस तेज ग्रोथ के पीछे सिर्फ कमोडिटी कीमतों का सहारा नहीं रहा। Lloyds Metals ने उत्पादन क्षमता बढ़ाने, ऑपरेशन को ज्यादा असरदार बनाने और लागत कम करने पर लगातार काम किया। इसी वजह से कंपनी की कमाई और मुनाफे में कई गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले पांच वर्षों में बिजनेस का स्केल तेजी से बढ़ा है और कंपनी ने खुद को सिर्फ खनन कारोबार तक सीमित नहीं रखा।
कंपनी की सबसे बड़ी ताकत महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में स्थित सूरजगढ़ आयरन ओर खदान है। वर्ष 2007 में मिले इस खदान अधिकार ने Lloyds Metals की तस्वीर बदल दी। कम लागत पर उत्पादन करने की क्षमता ने कंपनी को इंडस्ट्री में मजबूत स्थिति दिलाई है। इस खदान का लाइसेंस 2057 तक वैध है, जिससे लंबे समय तक कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित होती है।
वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का आयरन ओर उत्पादन करीब 22 मिलियन टन तक पहुंच गया। कंपनी आने वाले वर्षों में इसे और बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। साथ ही अब फोकस केवल आयरन ओर बेचने पर नहीं है, बल्कि ज्यादा वैल्यू वाले स्टील और दूसरे प्रोडक्ट्स तैयार करने पर भी है। इसी रणनीति के तहत कंपनी खदान से लेकर तैयार स्टील प्रोडक्ट तक पूरी वैल्यू चेन में अपनी मौजूदगी मजबूत कर रही है।
ऑपरेशन को बेहतर बनाने के लिए कंपनी ने खदान से प्लांट तक 85 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन तैयार की है, जिससे ट्रांसपोर्टेशन खर्च में बड़ी कमी आई है। एक नई पाइपलाइन परियोजना पर भी काम जारी है, जिसके पूरा होने पर लागत में और बचत होने की उम्मीद है। यही वजह है कि कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन वित्त वर्ष 2021 के 4% से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 33% तक पहुंच गया।
वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो कंपनी की बिक्री वित्त वर्ष 2021 के ₹251 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में ₹13,681 करोड़ हो गई। वहीं शुद्ध मुनाफा बढ़कर ₹3,194 करोड़ तक पहुंच गया। हालांकि कंपनी के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। कई बड़े प्रोजेक्ट्स निर्माण चरण में हैं और इनमें किसी भी तरह की देरी भविष्य की ग्रोथ को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा कंपनी का बड़ा हिस्सा अभी भी सूरजगढ़ खदान पर निर्भर है, इसलिए आने वाले वर्षों में विस्तार योजनाओं का सफल क्रियान्वयन इसकी अगली विकास कहानी तय करेगा।
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